अभी-अभी बेंगलुरु एयरपोर्ट पर अचानक रनवे से टकराया विमान, 179 यात्रियों की…

दिल्ली से बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2651 अचानक तब सबका ध्यान खींच रही थी, जब लैंडिंग के दौरान प्लेन का पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया। यह घटना बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुई, जहाँ प्लेन सुरक्षित रूप से लैंड हो गया, लेकिन इस टेक्निकल घटना से यात्रियों और एयरपोर्ट अधिकारियों में चिंता फैल गई। प्लेन में 179 यात्री और क्रू मेंबर थे। अच्छी बात यह रही कि किसी यात्री को चोट नहीं आई और सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, प्लेन का पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया था, जिसका मतलब है कि पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया था। घटना के बाद, प्लेन को तुरंत जांच के लिए ग्राउंड कर दिया गया और एयर इंडिया की टेक्निकल टीम ने डिटेल में जांच शुरू कर दी। एयरपोर्ट पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई, क्योंकि एविएशन सेक्टर में ऐसी घटनाओं को गंभीर माना जाता है।

एक और प्लेन का बैलेंस बिगड़ा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयर इंडिया की फ्लाइट के रनवे पर लैंड करने से ठीक पहले एक बड़े बोइंग 747 एयरक्राफ्ट ने उड़ान भरी थी। इस एयरक्राफ्ट से पैदा हुई तेज़ हवाओं और प्रेशर वेव्स, जिन्हें “वेक टर्बुलेंस” कहा जाता है, ने पीछे चल रही एयर इंडिया की फ्लाइट पर असर डाला। एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बड़े एयरक्राफ्ट टेकऑफ के बाद कुछ देर के लिए हवा में अस्थिरता महसूस करते हैं, जिससे पीछे चल रहे एयरक्राफ्ट का बैलेंस बिगड़ सकता है।

बताया गया है कि जैसे ही पायलट को लगा कि स्थिति अजीब है, उसने तुरंत स्टैंडर्ड सेफ्टी प्रोसीजर को फॉलो करते हुए गो-अराउंड करने का फैसला किया। हालांकि, एयरक्राफ्ट का पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया। पायलट की सतर्कता और अनुभव की वजह से एयरक्राफ्ट को कंट्रोल में कर लिया गया और सुरक्षित लैंड कराया गया। एयरलाइन सूत्रों का कहना है कि अगर समय पर फैसला नहीं लिया गया होता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। इसीलिए इस घटना को एक बड़ी मुसीबत टलने के तौर पर देखा जा रहा है।

जांच शुरू, एयरलाइन ने यात्रियों के लिए दूसरे इंतज़ाम किए

घटना के बाद, एयर इंडिया ने एक ऑफिशियल बयान जारी कर कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। एयरलाइन ने कहा कि सरकारी एविएशन नियमों के तहत जांच शुरू कर दी गई है और टेक्निकल इंस्पेक्शन पूरा होने तक एयरक्राफ्ट को ग्राउंडेड रखा जाएगा। इस घटना की वजह से बेंगलुरु से दिल्ली लौट रही फ्लाइट AI2652 को कैंसिल करना पड़ा। इससे कई यात्रियों को परेशानी हुई, हालांकि एयरलाइन ने उन्हें दूसरे फ्लाइट और दूसरी सुविधाओं का इंतज़ाम करने का भरोसा दिया है।

एयर इंडिया की ग्राउंड टीम को पैसेंजर की मदद के लिए एयरपोर्ट पर तैनात किया गया था। कुछ पैसेंजर ने सोशल मीडिया पर घटना के बाद की जानकारी शेयर की, जिसमें बताया गया कि लैंडिंग के दौरान हल्का झटका महसूस हुआ, लेकिन पायलट और क्रू ने पूरे समय शांति बनाए रखी। जांच एजेंसियां ​​अभी वेक टर्बुलेंस की गंभीरता और सभी सेफ्टी स्टैंडर्ड का पालन किया गया था या नहीं, इसकी जांच कर रही हैं।

‘टेल-स्ट्राइक’ असल में क्या है और इसे खतरनाक क्यों माना जाता है?

एविएशन इंडस्ट्री में, ‘टेल-स्ट्राइक’ का मतलब उस घटना से है जब टेकऑफ़, लैंडिंग या गो-अराउंड के दौरान एयरक्राफ्ट का पिछला हिस्सा रनवे से टकराता है। यह आमतौर पर तब होता है जब एयरक्राफ्ट बहुत ज़्यादा झुक जाता है या उसका एंगल कंट्रोल से बाहर हो जाता है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के अनुसार, टेल स्ट्राइक किसी भी एयरक्राफ्ट के लिए एक गंभीर टेक्निकल रिस्क पैदा कर सकता है, क्योंकि यह एयरक्राफ्ट की बॉडी और कंट्रोल सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है।

हालांकि हर टेल स्ट्राइक से एक्सीडेंट नहीं होता, लेकिन इसे हल्के में नहीं लिया जाता। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मॉडर्न एयरक्राफ्ट में कई सेफ्टी सिस्टम होते हैं जो ऐसी स्थिति में पायलट को अलर्ट करते हैं। इस मामले में भी, पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की सतर्कता ने एक बड़े एक्सीडेंट को टाल दिया। इस घटना के बाद एविएशन सेक्टर में वेक टर्बुलेंस और रनवे सेफ्टी को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।

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